बहुत खुबसुरत हैं , आँखे तुम्हारी !
बना दीजिये इन्हे , किस्मत हमारी !!
चाहिये उसे और , क्या जिन्दगी मेँ !
जिन्है मिल गयी , हो महोबत तुम्हारी !!
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आप जिस पर आँखें बंद करके भरोषा करते हों !
अक्सर वो ही आपकी आँखें खोल जाता है !!
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वो मेरा हैं उसका कोई नाम ना ले ,
इन भीगती आँखो से कोई और जाम ना ले !
इसलिए उसका हाथ नहीं छोड़ते हम ,
कही वो गिर जाये तो कोई और थाम ना ले !!
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उसकी आँखों में नजर आता है ,
सारा जहा मुझको !
अफ़सोस की उन आँखों में ,
कभी खुद को नहीं देखा !!
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कोई आँखों - आँखों से बात कर लेता है ,
कोई आँखों - आँखों में मुलाकात कर लेता है !!
बड़ा मुस्किल होता है , जबाब देना !
जब कोई , खामोश रहकर सवाल कर लेता है !!
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तेरी नाराजगी में भी महोबत्त हैं , ये लोग क्या जाने ?
तेरी सजा में भी एक मजा है , ये लोग क्या जाने ?
कहते है बात नही करोगी वो मुझसे ,
बात करने से तुम भी तड़पती हो , ये लोग क्या जाने ?
करती हो महोबत्त बेपनाह तुम भी मुझसे ,
पर छुपाना भी तुम्हारी एक अदा है , ये लोग क्या जाने ??
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सफ़ेद पत्थर नहीं मुमताज की याद में ,
सहजादे ने बनाया वो ताजमल देखने आया हुँ !
अगर निभा सको तो कर लो मुझसे दोस्ती ,
में आपसे दोस्ती करने को आया हुँ !!
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पतंग उड़ा आकाश में ले के प्यार का सँदेश ,
पर हम कैसे पहुचाये , हमारी महबूबा के पास ??
ये प्यार भरा सन्देश !!